जादू और धर्म में अंतर

जादू और धर्म में अंतर (difference between magic and religion)

धर्म तथा जादू में अन्तर-धर्म और जादू दोनों ही आलौकिक शक्ति में विश्वास से संबंधित होने तथा भावनात्मक सुरक्षा का साधन होने के कारण घनिष्ठ रूप से संबंधित है। इसके उपरान्त भी इनकी प्रकृति के आधार पर कुछ अन्तर स्पष्ट करने से इनको और अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा-

जादू और धर्म में अंतर
  1. धर्म एक सामाजिक तथ्य है जब कि जादू पूर्णतया एक वैयक्तिक क्रिया है जिसका उद्देश्य सामान्यतया किसी व्यक्ति विशेष को लाभ अथवा हानि पहुँचाना होता है।
  2. धर्म में अलौकिक शक्ति प्रधान है और मनुष्य गौण मनुष्य केवल उपासना कर सकता है इसका फल पूर्णतया आलौकिक शक्ति की इच्छा पर निर्भर है। दूसरी ओर जादू में मनुष्य प्रधान है और आलौकिक शक्ति गौण क्योंकि इसमें यह विश्वास किया जाता है कि अलौकिक शक्ति मनुष्य के नियंत्रण में रहकर उसी की इच्छानुसार कार्य करेगी।
  3. धर्म केवल विश्वास पर आधारित है जबकि जादू को कभी-कभी विज्ञान की श्रेणी तक में रख दिया जाता है इसका कारण यह है कि जादू के नियम अत्यधिक निश्चित प्रकृति के होते है।
  4. धर्म और धार्मिक क्रियाएं सदैव समूह के कल्याण के लिए होती है जब कि जादू रचनात्मक भी हो सकता है और हानिकारक भी।
  5. मैलिनोवास्की ने धर्म और जादू को इसकी जटिलता के आधार पर एक दूसरे से भिन्न माना है। धर्म सबके लिए है और सभी व्यक्ति धार्मिक क्रियाएं कर सकते है जब कि जादू केवल वहीं व्यक्ति कर सकते है जो एक विशेष प्रकार की क्रिया में पूर्णतया निपुण हो।
  6. धर्म की सफलता इसके प्रचार और सार्वजनिक वार्तालाप पर निर्भर है जबकि जादू तभी एक सफल रहता है जब तक इसे गुप्त रखा जाता है। सार्वजनिक होने पर जादू का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  7. फ्रेजर ने इस आधार पर भी धर्म और जादू में भेद माना है कि जादू की उत्पत्ति पहले हुई और इसमें कभी-कभी असफलता होने पर ही धर्म का विकास बाद में हुआ।

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