बस्ती। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने “गो सेवा” को सांस्कृतिक दायित्व के साथ-साथ एक सतत एवं पवित्र कार्य के रूप में स्वीकार करते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में दिखाई दे रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार की गो-संरक्षण नीति के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल संचालित किए जा रहे हैं, जहां 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन को भी मजबूती मिल रही है।
गौशालाओं के संचालन में पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से 5,446 गौशालाओं में 7,592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यह निगरानी प्रणाली 24 घंटे कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षा और देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित कर रही है।
मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत सरकार ने गो-संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया है। योजना के अंतर्गत अब तक 1,67,065 गोवंश जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किए जा चुके हैं। प्रत्येक गोवंश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से भरण-पोषण राशि सीधे गोपालकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है, जिससे गोपालकों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
जनपद बस्ती में भी जिला प्रशासन द्वारा गो-संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। जिले में वर्तमान समय में 47 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 3,792 गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। वहीं गो-संवर्धन सहभागिता योजना के अंतर्गत 174 गोपालकों ने 248 गोवंश को अपनाकर सामाजिक सहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि उ०प्र० गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अंतर्गत गोवंश की सुरक्षा को लेकर शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गो-तस्करी और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। शासन का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा भ्रम फैलाने और मिथ्या सूचनाएं प्रसारित करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सरकार गो सेवा और गो-संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निराश्रित गोवंश की सेवा और संरक्षण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। राज्य सरकार संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण के साथ सुशासन के सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है।









