पर्यावरण दिवस पर ‘पीपल की छांव में’ से निकलेगा हरियाली का रास्ता

By Arun Kumar

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पीपल बाबा ने 48 वर्षों के पर्यावरणीय अनुभवों को पुस्तक में किया संकलित, देशभर में लगाए ढाई करोड़ से अधिक पौधे

मेरठ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने वाले प्रसिद्ध पर्यावरणविद् पीपल बाबा उर्फ स्वामी प्रेम परिवर्तन अपनी पुस्तक ‘पीपल की छांव में’ के माध्यम से प्रकृति और हरियाली का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। इस पुस्तक में उन्होंने लगभग पांच दशकों के अपने अनुभवों, संघर्षों और पर्यावरण संरक्षण के अभियानों को समेटा है।

पीपल बाबा ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए देशभर में करीब 2.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ढाई करोड़ पेड़ और उतनी ही झाड़ियां लगाने का उल्लेखनीय कार्य किया है। मेरठ में उन्होंने सेना की विभिन्न इकाइयों के सहयोग से बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया है। इसके अलावा किचन गार्डन एसोसिएशन के साथ मिलकर साकेत और बाउंड्री रोड क्षेत्र में दो माइक्रो फॉरेस्ट विकसित किए हैं तथा कई विद्यालयों में हरियाली अभियान चलाया है।

हस्तिनापुर में भी होगा पौधारोपण अभियान

पीपल बाबा ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से उन्हें हस्तिनापुर में पौधारोपण का प्रस्ताव मिला है। वर्तमान में वहां सौंदर्यीकरण कार्य चल रहा है, जिसके पूर्ण होने के बाद बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान शुरू किया जाएगा।

वर्मी कंपोस्ट से पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार भी

गिव मी ट्रस्ट के पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड प्रोजेक्ट मैनेजर जगदीश ठाकुर ने बताया कि मेरठ के पल्लवपुरम स्थित उल्देपुर में वर्मी कंपोस्ट प्लांट संचालित किया जा रहा है। यहां करीब 350 बेड्स हैं, जिनसे हर माह 60 से 70 टन जैविक खाद का उत्पादन होता है। इस परियोजना से 10 महिलाओं को रोजगार भी मिला है।

उन्होंने बताया कि पीपल बाबा के नेतृत्व में मोदीनगर स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब, निवाड़ी परिसर में 10 हजार पौधे लगाए गए हैं। वहीं खतौली के जानसठ रोड स्थित उमरपुर लिसोड़ा गांव में एक सेंटर नर्सरी भी संचालित की जा रही है।

बचपन से पीपल के पेड़ से रहा विशेष लगाव

पीपल बाबा का कहना है कि पीपल का वृक्ष उन्हें बचपन से ही आकर्षित करता रहा है। उन्होंने पिछले 48 वर्षों को इस महत्त्वपूर्ण प्रजाति के पौधारोपण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया है। उनका कहना है कि यह पुस्तक प्रकृति के साथ उनके लंबे और भावनात्मक रिश्ते को साझा करने का माध्यम है।

उन्होंने बताया कि उनकी नानी के कारण उन्हें उत्तराखंड के जंगलों, कॉर्बेट, राजाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों को करीब से जानने का अवसर मिला। बाद में परिवार का तबादला हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में हुआ, जहां प्रकृति के प्रति उनका जुड़ाव और गहरा हुआ।

लॉकडाउन में भी प्रकृति बनी साथी

पीपल बाबा ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में भी वह घर की चारदीवारी में सीमित नहीं रह सके। पौधों को पानी देना, धूप की गर्माहट महसूस करना और हवा से संवाद करना उनके जीवन का हिस्सा बना रहा। उनका मानना है कि प्रकृति ने इंसान को खुले आसमान के नीचे जीने के लिए बनाया है।

पेंग्विन प्रकाशन द्वारा लॉन्च होगी पुस्तक

पीपल बाबा की पुस्तक ‘पीपल की छांव में’ का प्रकाशन पेंग्विन प्रकाशन द्वारा किया जा रहा है। यह पुस्तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों, विशेष रूप से अमेजन सहित अन्य प्रमुख माध्यमों पर उपलब्ध होगी। पुस्तक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

Arun Kumar

Arun Kumar is a senior editor and writer at www.bhartiyasarokar.com. With over 4 years of experience, he is adept at crafting insightful articles on education, government schemes, employment opportunities and current affairs.

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