25 मई को सांस्कृतिक महाआयोजन, पहल संस्था के प्रयास से विश्व पटल पर चमकेगी बस्ती की लोक परंपरा

By Arun Kumar

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बस्ती। जनपद बस्ती 25 मई को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव के क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। जिले की 2100 माताएं, बहनें और बेटियां एक साथ पारंपरिक ‘रामजी का सोहर’ गाकर न केवल बस्ती की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत करेंगी, बल्कि सनातन परंपरा और भारतीय लोकगीत विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने का प्रयास भी करेंगी। इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन को लेकर पूरे जिले में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना हुआ है।

कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए रविवार को विशाल पूर्वाभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल माताएं, बहनें और बेटियां पूरे आत्मविश्वास और श्रद्धा के साथ ‘रामजी का सोहर’ का अभ्यास करती नजर आईं। कार्यक्रम स्थल पूरी तरह भक्तिमय माहौल में रंगा दिखाई दिया।

इस ऐतिहासिक आयोजन के पीछे पहल संस्था के संस्थापक के विशेष प्रयास और दूरदर्शी सोच को प्रमुख माना जा रहा है। वे लंबे समय से बस्ती जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी जिले की असली पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता से होती है। इसी सोच के तहत ‘रामजी का सोहर’ जैसे लोकगीत को एक विशाल सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप दिया गया है।

आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्ती की एकता, आस्था और गौरव का महाउत्सव है। कार्यक्रम के माध्यम से जिले की लोक परंपराओं और भारतीय संस्कृति की झलक देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार ‘रामजी का सोहर’ भारतीय लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो शुभ अवसरों और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।

आयोजकों ने कहा कि “मेरे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद बस्तीवासियों का प्रेम और विश्वास है। हम सबने मिलकर संकल्प लिया है कि बस्ती को नई पहचान देंगे और पूरे विश्व में गौरव दिलाएंगे।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में हर शुभ कार्य भगवान श्रीराम के स्मरण से प्रारंभ होता है और ‘रामजी का सोहर’ हमारी आस्था एवं लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर है।

आयोजकों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे जिले का उत्सव है। इसमें समर्थक-विरोधी, जाति-पंथ और विचारधारा से ऊपर उठकर प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने बस्तीवासियों से अपील की कि वे अपने मतभेद भुलाकर इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनें और जिले की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी सहभागिता निभाएं। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और बस्ती के लिए गौरव का प्रतीक बनने जा रहा है।

Arun Kumar

Arun Kumar is a senior editor and writer at www.bhartiyasarokar.com. With over 4 years of experience, he is adept at crafting insightful articles on education, government schemes, employment opportunities and current affairs.

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