- बस्ती के दुबौलिया ब्लाक में स्थित उमरिया गांव में है जन्मस्थली
- आठ वर्ष की उम्र में ही घर से देवरिया चले गए थे देवरहवा बाबा
- जन्म स्थली पर आ चुके हैं संजय गांधी, साध्वी ऋतंभरा व अशोक सिंघल
संजय कुमार / अरुण कुमार
बस्ती: सिद्ध योगी देवरहवा बाबा बस्ती (Basti) के उमरिया गांव के मूल निवासी थे। हालांकि तमाम लोग उनका जन्म स्थान देवरिया के लार रोड पर स्थित नदौली गांव बताते हैं, पर बस्ती के उमरिया गांव में रहने वाले दुबे परिवार के लोगों का दावा है कि उनका जन्म उन्हीं के घर हुआ था। वह आठ वर्ष की उम्र में देवरिया चले गए थे, इसी कारण लोग उन्हें देवरिया का निवासी बताते हैं।
भव्य मंदिर
उमरिया में उनके जन्म स्थली के बगल एक भव्य मंदिर बना हुआ है, इसमें देवरहवा बाबा की मूर्ति के अलावा उनके कई प्राचीन चित्र लगे हुए हैं। वहीं कई देवी देवताओं की मूर्तियां भी इसमें स्थापित हैं।
परिवार के लोग
खुद को देवरहवा बाबा के परिवार का बताने वाले उमरिया गांव निवासी प्रदुम्न दुबे का कहना है कि देवरहवा बाबा के नाती सीताराम (स्वामी सुदर्शनाचार्य) थे। वह उन्हीं के नाती हैं। बताया कि उनके बाबा, सिद्ध योगी देवरहवा बाबा के बारे में उन्हें बताया करते थे। उनके अनुसार घर से जाने के बाद केवल एक बार गांव लौट कर आए, वह अपने पिता रामजस द्विवेदी की मृत्यु पर आए थे। वह नदी के किनारे बैठे थे। लोग उन्हें ठीक से पहचान नहीं पा रहे थे, बाद में पलक झपकने के कारण उनको परिवार के लोग पहचान पाए और घर ले आए। वह घर के अंदर नहीं आए, बल्कि बाहर ही एक कुएं के पास बैठे रहे।

विष्णु पुराण महायज्ञ
परिवार के लोगों से बात करते करते अचानक वह अर्न्तध्यान हो गए। देवरहवा बाबा की जन्म स्थली के बगल एक भव्य मंदिर के अलावा यज्ञशाला का निर्माण करवाया गया। प्रदुम्न की माने तो उनकी पुण्य तिथि पर जुलाई में विष्णु पुराण महायज्ञ का आयोजन यहां होता है।
जन्मस्थली पर बोर्ड तक नहीं
देवरहा बाबा ने आषाढ की एकादशी पर वर्ष 1990 में शरीर छोड़ा था। उस दिन फलाहार तो द्वादशी पर भंडारा का आयोजन किया जाता है। इन सबके बाद भी उनके जन्मस्थली को पहचान नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि उनके गांव को जाने वाले मार्ग पर जन्म स्थली को लेकर एक बोर्ड तक नहीं लगाया है।
इतना ही नहीं मंदिर व यज्ञशाला के पास हाईमास्ट लाइट या रोशनी के अन्य इंतजाम नहीं किए गए हैं। पर्यटन विभाग व जनप्रतिनिधियों ने भी इस पवित्र स्थान की सुध नहीं ली।
देवरहवा बाबा उनके पूर्वज हैं, दुबौलिया विकास खंड के उमरिया में सरयू नदी के किनारे ही बाबा की जन्म स्थली है। बाबा का जन्म यहीं हुआ था। बाद में वे देवरिया चले गए और लोग उन्हें देवरिया का समझने लगे, जबकि सच्चाई यह है कि बाबा का जन्म यहीं हुआ था। – रामदास उर्फ अनिल दास, महंत,चतुर्भुजी मंदिर लोनियापार (अमोढा)
देवरहवा बाबा दुबे परिवार में पैदा हुए थे। उन्हीं के वंशज वह भी हैं। उमरिया से उनके वंशज जिले के कई क्षेत्रों में जाकर बस गए। कहा कि दुर्भाग्य है कि बाबा के जन्मस्थली को वह पहचान नहीं मिल पाई जो मिलनी चाहिए थी। – अनिल दुबे, ब्लाक प्रमुख कुदरहा (बस्ती)









